رسول اکرم (ص)
عَلَيكَ بِمُجالَسَةِ أهلِ الذِّكرِ، و إذا خَلَوتَ فَحَرِّك لِسانَكَ مَا استَطَعتَ بِذِكرِ اللّهِ عز و جل، و أحبِب فِي اللّهِ، و أبغِض فِي اللّهِ
تاريخ دمشق : ج ١٣ ص ٣١٧ ح ٣٢٨٥
रसूले अकरम स.अ.
तुम पर अहले ज़िक्र की हमनशीनी लाज़िम है, जब भी अकेले हों तो अपनी ज़बान को ज़िक्रे इलाही में मसरूफ़ रखो, अल्लाह के लिए दोस्ती करो और उसके लिए ही दुश्मनी करो।
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